Main पिछले साल जुलाई में Hemkund Sahib की यात्रा करके लौटा हूं। Friends सच कहूं तो यह यात्रा मेरी जिंदगी का सबसे कठिन और सबसे अद्भुत अनुभव रही। गोविंदघाट से लेकर हेमकुंड साहिब तक का रास्ता ऐसा है जो आपकी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परीक्षा लेता है। लेकिन जब ऊपर पहुंचकर बर्फीले पहाड़ों के बीच वो पवित्र सरोवर दिखता है तो सारी थकान गायब हो जाती है। 2026 में अगर आप यह यात्रा करने का मन बना रहे हैं तो मैंने अपने अनुभव से जो कुछ सीखा वो पूरा इस गाइड में लिख रहा हूं। यहां सब कुछ मिलेगा जो आपको जानना जरूरी है।
हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 पूरी जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| धार्मिक स्थल | गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब |
| राज्य | उत्तराखंड |
| ऊंचाई | समुद्र तल से लगभग 4632 मीटर |
| गोविंदघाट से कुल दूरी | लगभग 21 किलोमीटर |
| घांघरिया से हेमकुंड दूरी | लगभग 6 किलोमीटर |
| ट्रेक का समय पैदल | 2 दिन आने जाने में |
| ट्रेक कठिनाई स्तर | कठिन |
| यात्रा का मौसम | जून से अक्टूबर |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | ऋषिकेश लगभग 275 किलोमीटर |
| निकटतम हवाई अड्डा | जॉली ग्रांट देहरादून लगभग 295 किलोमीटर |
| खच्चर किराया अनुमानित | 700 से 2500 रुपये |
| ट्रेक पैकेज कीमत | 3500 से 12000 रुपये प्रति व्यक्ति |
Govindghat Trek Real
हेमकुंड साहिब की पूरी यात्रा गोविंदघाट से शुरू होती है। गोविंदघाट अलकनंदा नदी के किनारे बसा एक छोटा सा कस्बा है। यहां पर गुरुद्वारा साहिब की व्यवस्था है जहां यात्री रात रुकते हैं और सुबह ट्रेक शुरू करते हैं।
गोविंदघाट से पहले 4 किलोमीटर तक सड़क बनी है जहां तक छोटे वाहन जाते हैं। यह जगह पुलना कहलाती है। पुलना से आगे पैदल चलना शुरू होता है। पुलना से घांघरिया तक लगभग 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा है। घांघरिया वो आखिरी गांव है जहां रुकने और खाने की व्यवस्था मिलती है।

मैं जब गया था तो गोविंदघाट में एक रात रुका। सुबह 5 बजे निकला और दोपहर 1 बजे तक घांघरिया पहुंच गया। रास्ते में कई जगह चाय और नाश्ते की छोटी दुकानें मिलीं जो बहुत राहत देती हैं।
Distance Time Truth
बहुत सी जगहों पर लिखा मिलता है कि गोविंदघाट से हेमकुंड 6 से 7 घंटे में पहुंच जाते हैं। लेकिन यह बात सिर्फ बहुत अनुभवी ट्रेकर्स पर लागू होती है। सामान्य यात्रियों को इससे ज्यादा समय लगता है।
असली समय का हिसाब
| रास्ता | दूरी | अनुमानित समय पैदल |
|---|---|---|
| गोविंदघाट से पुलना | 4 किलोमीटर | वाहन से 15 मिनट |
| पुलना से घांघरिया | 10 किलोमीटर | 5 से 7 घंटे |
| घांघरिया से हेमकुंड साहिब | 6 किलोमीटर | 4 से 6 घंटे |
| हेमकुंड से घांघरिया वापसी | 6 किलोमीटर | 2.5 से 3.5 घंटे |
मेरे अनुभव में पुलना से घांघरिया तक 6 घंटे लगे थे। अगले दिन घंगरिया से हेमकुंड साहिब तक 5 घंटे लगे। वापसी में उतराई होती है ,इसलिए 3 घंटे में लौट आया। कुल मिलाकर 2 दिन का समय दें इस यात्रा को। एक दिन में करने की कोशिश न करें।
Trek Package Best
2026 में कई संस्थाएं हेमकुंड साहिब ट्रेक पैकेज दे रही हैं। इनमें रहना, खाना और मार्गदर्शक सब शामिल होता है। लेकिन हर पैकेज एक जैसा नहीं है।
पैकेज की तुलना
| पैकेज का प्रकार | अनुमानित कीमत 2026 | क्या शामिल है |
|---|---|---|
| बजट पैकेज | 3500 से 5000 रुपये | रहना खाना मार्गदर्शक |
| मानक पैकेज | 5500 से 8000 रुपये | रहना खाना मार्गदर्शक खच्चर |
| आरामदायक पैकेज | 8000 से 12000 रुपये | अच्छा होटल खाना खच्चर मार्गदर्शक |
मेरी सलाह है कि मानक पैकेज लें जिसमें खच्चर शामिल हो। वापसी में पैर इतने थक जाते हैं कि खच्चर बहुत काम आता है। सबसे सस्ता पैकेज लेकर बाद में अलग से खच्चर लेने पर ज्यादा खर्चा होता है।
पैकेज लेते समय पूछ लें कि ऋषिकेश से गोविंदघाट तक की गाड़ी शामिल है या नहीं। कुछ पैकेज सिर्फ गोविंदघाट से शुरू होते हैं जबकि कुछ ऋषिकेश से लेकर जाते हैं।
Booking Fast Must
हेमकुंड साहिब की यात्रा का मौसम बहुत छोटा है। जून से अक्टूबर के बीच सिर्फ 4 से 5 महीने यह रास्ता खुला रहता है। इसी दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं और रहने की जगह बहुत जल्दी भर जाती है।
घांघरिया में रहने की व्यवस्था सीमित है। गुरुद्वारा साहिब में मुफ्त में रुका जा सकता है लेकिन जगह पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मिलती है। छोटे होटल और गेस्ट हाउस जुलाई-अगस्त में 20 से 25 दिन पहले भर जाते हैं।
पैकेज की बुकिंग कम से कम 15 से 20 दिन पहले करें। जून और सितंबर में थोड़ी कम भीड़ होती है,, तो 10 दिन पहले भी मिल सकता हैजुलाई-अगस्त में 25 से 30 दिन पहले बुकिंग करना सही रहता है।
Hidden Trek Facts
कुछ बातें हैं जो हेमकुंड यात्रा के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं पता और ये बातें जानना बहुत जरूरी है।
पहली बात यह है कि हेमकुंड साहिब पर रात को रुकने की अनुमति नहीं है। वहां कोई होटल या रुकने की जगह नहीं है। सुबह जाएं और शाम तक घंगरिया वापस लौटना जरूरी है। दूसरी बात यह है कि ऊपर मौसम बहुत तेजी से बदलता है। धूप में निकलें और आधे घंटे में बारिश या ओले शुरू हो जाएं।
तीसरी बात यह है कि हेमकुंड सरोवर का पानी बहुत ठंडा होता है। श्रद्धालु स्नान करते हैं ,लेकिन पानी का तापमान 4 से 5 डिग्री तक होता है। शरीर को झटका लग सकता है इसलिए तैयार रहें। चौथी बात यह है कि रास्ते में शौचालय बहुत कम हैं और जो हैं उनकी स्थिति अच्छी नहीं है।
Mule vs Walking
यह सवाल हर यात्री पूछता है। मैं बताता हूँ कि पैदल और खच्चर दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।
पैदल जाने का फायदा यह है कि आप अपनी गति से चलते हैं। जहां मन करे, वहां रुकें, तस्वीरें लें और प्रकृति का आनंद उठाएं। लेकिन 21 किलोमीटर की चढ़ाई बहुत थका देने वाली है। अगर रोजाना व्यायाम नहीं करते तो पैरों में बहुत दर्द होता है।
खच्चर लेने पर आराम मिलता है, लेकिन रास्ता ऊबड़ खाबड़ है और खच्चर पर बैठना भी आसान नहीं है। कमर में दर्द हो सकता है। खच्चर का किराया रास्ते और मौसम के हिसाब से बदलता है।
| रास्ता | खच्चर किराया 2026 अनुमानित |
|---|---|
| पुलना से घांघरिया | 700 से 1200 रुपये |
| घांघरिया से हेमकुंड साहिब | 1000 से 2000 रुपये |
| दोनों तरफ आना जाना | 1500 से 2500 रुपये |
मेरी सलाह है कि चढ़ाई पैदल करें और उतराई में खच्चर लें। इससे अनुभव भी मिलता है और थकान भी कम रहती है। लेकिन बुजुर्ग या कम शारीरिक क्षमता वाले लोग दोनों तरफ खच्चर लें।
Rishikesh Drive Time
ऋषिकेश से गोविंदघाट तक की सड़क यात्रा लगभग 9 से 11 घंटे लेती है। दूरी करीब 275 किलोमीटर है लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वजह से गति बहुत कम रहती है।
रास्ते में देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली और जोशीमठ होते हुए गोविंदघाट पहुंचते हैं। जोशीमठ से गोविंदघाट सिर्फ 25 किलोमीटर है लेकिन सड़क संकरी है।
बारिश के मौसम में भूस्खलन आम बात है।भीड़ कभी-कभी 4 से 5 घंटे तक बंद रहती है। इसलिए सफर का समय 12 से 14 घंटे भी हो सकता है। मैं जब गया था तो चमोली के पास 2 घंटे रुकना पड़ा था भूस्खलन की वजह से।
सुबह जल्दी ऋषिकेश से निकलें तो शाम तक गोविंदघाट पहुंच सकते हैं। रात को गाड़ी न चलाएं क्योंकि पहाड़ी रास्ते पर अंधेरे में गाड़ी चलाना सुरक्षित नहीं है।
Altitude Sickness Tips
हेमकुंड साहिब 4632 मीटर की ऊंचाई पर है, जो बहुत ज्यादा है। ऊंचाई की बीमारी यहां बहुत आम है और इसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
मुझे खुदगर्दन, दर्द और चक्कर की शिकायत हुई थी। मैंने पानी ज्यादा पिया और हल्का खाना खाया तो सुबह तक ठीक हो गया। लेकिन मेरे साथ एक यात्री को बहुत तकलीफ हुई और उन्हें वापस भेजना पड़ा।
कुछ जरूरी बातें ध्यान रखें। दिन में 3 से 4 लीटर पानी पीएं। शराब और धूम्रपान बिल्कुल न करें। भारी खाना न खाएं। धीरे धीरे चढ़ें और बीच में आराम करते रहें। अगर सिर दर्द बहुत तेज हो या सांस लेने में बहुत तकलीफ हो तो तुरंत नीचे उतरें और चिकित्सा सहायता लें।
Snow Season Open
हेमकुंड साहिब की यात्रा साल में सिर्फ कुछ महीने ही होती है। बाकी समय यह पूरा इलाका बर्फ से ढका रहता है और रास्ता बंद रहता है।
2026 में यात्रा जून के पहले या दूसरे हफ्ते में खुलने की संभावना है। यह बर्फ पिघलने पर निर्भर करता है। बंद होने का समय अक्टूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में होता है।
जून में रास्ते पर जगह-जगह बर्फ मिलती है, जो चलने में मुश्किल बनाती है। जुलाई अगस्त में बारिश होती है लेकिन रास्ता साफ रहता है। सितंबर सबसे अच्छा महीना माना जाता है जब न ज्यादा बारिश होती है न बर्फ।
Valley Flowers Combo
घांघरिया से फूलों की घाटी जाने का रास्ता भी निकलता है। यह दोनों जगहें एक ही आधार शिविर से जुड़ी हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा के साथ फूलों की घाटी देखना बहुत अच्छा अनुभव है।
घांघरिया से फूलों की घाटी लगभग 3.5 किलोमीटर दूर है। एक दिन हेमकुंड जाएं और दूसरे दिन फूलों की घाटी। इसके लिए घांघरिया में 2 रातें रुकना पड़ेगा। फूलों की घाटी का प्रवेश शुल्क 150 रुपये प्रति व्यक्ति है।
जुलाई और अगस्त में फूलों की घाटी सबसे सुंदर दिखती है। सैकड़ों किस्मों के जंगली फूल खिले होते हैं और पूरी घाटी रंगों से भरी रहती है। मैंने दोनों जगहें देखीं और मेरा अनुभव कहता है कि अगर समय हो तो दोनों जरूर देखें।
Budget Stay Ghangaria
घांघरिया में रुकने के कई विकल्प हैं। सबसे सस्ता विकल्प गुरुद्वारा साहिब है जहां मुफ्त में रुका जा सकता है और लंगर भी मिलता है। लेकिन जगह सीमित है और पहले आने वाले को मिलती है।
| रहने का विकल्प | अनुमानित किराया 2026 |
|---|---|
| गुरुद्वारा साहिब | निशुल्क दान स्वैच्छिक |
| बजट गेस्ट हाउस | 400 से 800 रुपये |
| मध्यम होटल | 800 से 1500 रुपये |
| बेहतर होटल | 1500 से 3000 रुपये |
मैं गुरुद्वारा में रुका था और अनुभव बहुत अच्छा रहा। साफ-सफाई अच्छी थी और लंगर में गर्म खाना मिला। लेकिन कमरे में 8 से 10 लोग एक साथ रहते हैं। अगर निजी जगह चाहिए तो गेस्ट हाउस या होटल लें।
गर्म पानी की सुविधा हर जगह नहीं मिलती। बेहतर होटल में गर्म पानी मिलता है, लेकिन बजट गेस्ट हाउस में नहीं। इसलिए सर्दी सहने की तैयारी रखें।
Trek Gear Checklist
हेमकुंड की यात्रा के लिए सही सामान होना बहुत जरूरी है। मैंने पहली बार जब गया तो कई चीजें नहीं ले गया था और बहुत पछतावा हुआ।
गर्म कपड़े सबसे जरूरी हैं। ऊपर तापमान शून्य के आसपास रहता है। बारिश का कपड़ा या बरसाती जरूरी है। अच्छे पकड़ वाले जूते बहुत जरूरी हैं। फिसलन भरे रास्ते पर सामान्य जूते काम नहीं करते। छड़ी या ट्रेकिंग पोल लें जो चढ़ाई और उतराई दोनों में सहायक होती है।
पानी की बोतल, सूखे मेवे, बिस्कुट और चॉकलेट साथ रखें। ऊपर कोई दुकान नहीं है। धूप का चश्मा लें क्योंकि बर्फ पर धूप की चमक आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। प्राथमिक चिकित्सा पेटी में सिर दर्द की दवा, पट्टी और एंटीसेप्टिक जरूर रखें।
Kids Elderly Trek
यह बहुत जरूरी सवाल है। हेमकुंड साहिब की यात्रा कठिन है और हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। 10 साल से छोटे बच्चों को ले जाना ठीक नहीं है। ऊंचाई पर बच्चों को सांस की तकलीफ हो सकती है और रास्ता बहुत लंबा है।
बुजुर्गों के लिए भी यह यात्रा चुनौतीपूर्ण है। लेकिन खच्चर या पालकी की सुविधा उपलब्ध है। पालकी का किराया ज्यादा होता है लगभग 4000 से 8000 रुपये तक। अगर बुजुर्ग शारीरिक रूप से सक्षम हैं और नियमित रूप से चलते हैं तो खच्चर पर जा सकते हैं।
हृदय रोग, दमा या सांस से जुड़ी किसी भी बीमारी वाले लोग यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। ऊंचाई पर ये बीमारियां गंभीर हो सकती हैं।
Local Guide Needed
गोविंदघाट से हेमकुंड तक का रास्ता साफ है और रास्ते में बहुत सारे यात्री मिलते हैं। इसलिए मार्गदर्शक लेना अनिवार्य नहीं है। लेकिन अगर पहली बार जा रहे हैं और पहाड़ों का अनुभव कम है, तो मार्गदर्शक लेना अच्छा रहता है।
मार्गदर्शक का शुल्क लगभग 500 से 1000 रुपये प्रतिदिन होता है। वो आपकी गति के हिसाब से चलता है और जरूरत पड़ने पर मदद करता है। पैकेज में मार्गदर्शक शामिल होता, है इसलिए अलग से लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
Pros और Cons
Pros
- गुरुद्वारा साहिब में मुफ्त रहने और खाने की व्यवस्था है
- फूलों की घाटी भी साथ में देखने का मौका मिलता है
- रास्ता साफ और चिह्नित है भटकने का खतरा कम है
- खच्चर और पालकी की सुविधा हर जगह उपलब्ध है
- प्रकृति और आध्यात्मिकता दोनों का अनुभव मिलता है
Cons
- ट्रेक बहुत कठिन है और शारीरिक तैयारी जरूरी है
- ऊंचाई की बीमारी का खतरा बना रहता है
- बारिश के मौसम में भूस्खलन से सड़क बंद हो सकती है
- हेमकुंड पर रात रुकने की अनुमति नहीं है
- यात्रा का मौसम बहुत छोटा है सिर्फ 4 से 5 महीने
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हेमकुंड साहिब 2026 में कब खुलेगा
हेमकुंड साहिब 2026 में जून के पहले या दूसरे हफ्ते में खुलने की संभावना है। सटीक तारीख बर्फ पिघलने की स्थिति पर निर्भर करती है और गुरुद्वारा प्रबंधक समिति तय करती है।
गोविंदघाट में पार्किंग की सुविधा है क्या,,
हां, गोविंदघाट में गाड़ी खड़ी करने की जगह है। पार्किंग शुल्क लगभग 100 से 200 रुपये प्रतिदिन है। गाड़ी सुरक्षित र,हती है लेकिन कीमती सामान गाड़ी में न छोड़ें।
क्या हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है
2026 में गोविंदघाट से घांघरिया तक हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध होने की संभावना है। किराया लगभग 3000 से 5000 रुपये प्रति व्यक्ति हो सकता है। लेकिन यह सेवा मौसम पर निर्भर करती है और बारिश में अक्सर बंद रहती है।
घांघरिया में खाना कैसा मिलता है
घांघरिया में गुरुद्वारा साहिब का लंगर सबसे अच्छा विकल्प है। इसके अलावा छोटी दुकानों पर दाल चावल, रोटी और मैगीहैंलती है। खाने की कीमत मैदानी इलाकों की तुलना में ज्यादा है क्योंकि सारा सामान खच्चरों पर लादकर ऊपर लाया जाता है। एक थाली 150 से 300 रुपये में मिलती है।
हेमकुंड सरोवर में स्नान जरूरी है क्या
स्नान करना श्रद्धालुओं की श्रद्धा पर निर्भर है। कोई बाध्यता नहीं है। सरोवर का पानी बेहद ठंडा होता है और हर किसी के लिए स्नान करना संभव नहीं है। जो लोग स्नान करते हैं वो जल्दी से करते हैं क्योंकि ज्यादा देर पानी में रहना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
निष्कर्ष
Hemkund Sahib की यात्रा भारत की सबसे पवित्र और सबसे कठिन यात्राओं में से एक है। गोविंदघाट से शुरू होकर 4632 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना आसान नहीं है लेकिन वो अनुभव जीवन में एक बार जरूर लेना चाहिए।
2026 में जाने का प्लान बना रहे हैं तो 15 से 20 दिन पहले पैकेज या रहने की बुकिंग कर लें। शारीरिक तैयारी पहले से शुरू करें। कम से कम एक महीना पहले रोजाना चलना शुरू करें ताकि ट्रेक में ज्यादा तकलीफ न हो।
सितंबर का पहला हफ्ता सबसे अच्छा समय है जब न भीड़ होती है, न ज्यादा बारिश और न बर्फ। फूलों की घाटी भी साथ में देखें तो दोनों का अनुभव अविस्मरणीय रहता है। बस तैयारी पूरी करके जाएं तो यह यात्रा जीवन की सबसे सुंदर यादों में शामिल हो जाएगी।






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