वाराणसी के घाटों में एक ऐसा घाट है जहाँ जाकर इंसान ठहर जाता है। न कोई भागदौड़, न कोई शोर। बस जिंदगी और मौत का एक अनकहा सच सामने होता है जो अंदर तक हिला देता है। Harishchandra Ghat वाराणसी का दूसरा सबसे पुराना श्मशान घाट है जहाँ सदियों से अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ श्मशान नहीं है। यह जगह आपको जीवन का असली मतलब समझा देती है। अगर आप 2026 में वाराणसी घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह घाट और इसके आसपास के 50 KM में छुपे हुए टूरिस्ट प्लेसेस आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगे। यह गाइड आपको होटल बुकिंग से लेकर वन डे ट्रिप प्लान तक सब कुछ बताएगी।
मैंने खुद इस घाट पर घंटों बैठकर वो अनुभव किया है जो शब्दों में बयान करना मुश्किल है। चिता की आग, गंगा का बहाव और आसपास बैठे साधुओं की खामोशी कुछ ऐसा माहौल बनाती है जो कहीं और नहीं मिलता। यह आर्टिकल मेरे अपने अनुभव और रिसर्च पर आधारित है।
Harishchandra Ghat Overview Table
| जानकारी | डिटेल |
|---|---|
| घाट का नाम | हरिश्चंद्र घाट |
| शहर | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| घाट का प्रकार | श्मशान घाट और टूरिस्ट प्लेस |
| नजदीकी रेलवे स्टेशन | वाराणसी जंक्शन 4 KM |
| नजदीकी एयरपोर्ट | लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट 25 KM |
| बेस्ट टाइम टू विजिट | अक्टूबर से मार्च |
| एंट्री फीस | कोई फीस नहीं |
| घूमने का समय | 1 से 2 घंटे |
| नजदीकी फेमस घाट | मणिकर्णिका घाट और दशाश्वमेध घाट |
| 50 KM में टूरिस्ट प्लेसेस | सारनाथ, रामनगर किला, चुनार किला |
Harishchandra Ghat
इस घाट का नाम राजा हरिश्चंद्र के नाम पर पड़ा है। कहा जाता है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने यहीं डोम का काम किया था। उन्होंने सच बोलने की कसम खाई थी और उसी कसम को निभाते हुए इस श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की लकड़ियाँ बेचीं।

यह घाट मणिकर्णिका घाट के बाद दूसरा सबसे पुराना श्मशान घाट है। यहाँ दिन रात चिताएँ जलती रहती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार वाराणसी में अंतिम संस्कार होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से देश के कोने-कोने से लोग यहाँ आते हैं। लेकिन इस घाट की एक और पहचान है। यहाँ की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा विदेशी टूरिस्ट्स को भी अपनी ओर खींचती है।
Harishchandra Ghat
जब आप इस घाट पर पहुँचते हैं तो सबसे पहले चंदन और लकड़ी की खुशबू आती है। सीढ़ियों पर बैठकर गंगा का बहाव देखना एक अलग ही अनुभव है। यहाँ जीवन और मृत्यु दोनों एक साथ दिखते हैं। एक तरफ चिता जल रही होती है और दूसरी तरफ लोग गंगा में डुबकी लगा रहे होते हैं।
शाम के वक्त यहाँ का नजारा और भी खास हो जाता है। दीयों की रोशनी, गंगा की लहरें और आरती की आवाज मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो दिल को छू जाता है। फोटोग्राफी यहाँ करने से पहले ध्यान रखें कि श्मशान एरिया में फोटो लेना मना है। लेकिन घाट के बाकी हिस्सों में आप तस्वीरें ले सकते हैं।
50 KM के Hidden Tourist Places
वाराणसी सिर्फ घाटों का शहर नहीं है। इसके 50 KM के दायरे में कई ऐसी जगहें हैं जो ज्यादातर टूरिस्ट मिस कर देते हैं। ये Hidden Tourist Places आपकी ट्रिप को और भी खास बना सकते हैं।
सारनाथ जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया
सारनाथ वाराणसी से सिर्फ 10 KM दूर है। यहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहला उपदेश दिया था। धमेक स्तूप, अशोक स्तंभ और म्यूजियम देखने लायक हैं। यहाँ 2 से 3 घंटे का समय पर्याप्त है। एंट्री फीस भारतीयों के लिए 25 रुपये और विदेशियों के लिए 300 रुपये है।
रामनगर किला गंगा के उस पार का इतिहास
गंगा के दूसरे किनारे पर रामनगर किला है जो वाराणसी से करीब 14 KM दूर है। यह काशी नरेश का निवास स्थान रहा है। किले के अंदर म्यूजियम में पुरानी बंदूकें, पालकियाँ और शाही सामान रखा है। यहाँ से गंगा का नजारा बेहद खूबसूरत दिखता है। एंट्री फीस 15 रुपये है।
चुनार का किला जो 50 KM
वाराणसी से करीब 40 KM दूर चुनार का किला है। यह किला गंगा किनारे एक पहाड़ी पर बना है। इसका इतिहास बहुत पुराना है और कई राजाओं ने इस पर राज किया। यहाँ जाने का रास्ता बहुत सुंदर है और किले से ऊपर से दृश्य लाजवाब है।
चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी
यह जगह वाराणसी से करीब 70 KM दूर है लेकिन अगर आपके पास एक दिन एक्स्ट्रा है तो जरूर जाएँ। झरने, गुफाएँ और जंगल यहाँ की खासियत हैं। राजदारी और देवदारी वॉटरफॉल बहुत मशहूर हैं। पिकनिक के लिए यह परफेक्ट जगह है।
Hotel Booking
वाराणसी में हर बजट के होटल मिलते हैं। Harishchandra Ghat के पास कई गेस्ट हाउस और होटल हैं जो किफायती भी हैं और साफ-सुथरे भी।
बजट होटल 500 से 1500 रुपये प्रति रात
घाटों के पास कई गेस्ट हाउस हैं जहाँ 500 से 1500 रुपये में अच्छा कमरा मिल जाता है। Zostel वाराणसी बैकपैकर्स के बीच काफी पॉपुलर है जहाँ डॉर्म बेड 400 रुपये से शुरू होता है। गोदौलिया और अस्सी घाट के पास भी कई बजट ऑप्शन हैं।
मिड रेंज होटल 1500 से 4000 रुपये प्रति रात
अगर थोड़ा बेहतर कम्फर्ट चाहिए तो 1500 से 4000 रुपये में अच्छे होटल मिलते हैं। Hotel Surya, Palace on Ganges और Amritara Suryauday Haveli अच्छे ऑप्शन हैं। इनमें गंगा व्यू रूम भी मिलते हैं जो एक्सपीरियंस को और खास बना देते हैं।
लग्जरी होटल 5000 रुपये से ऊपर
Taj Ganges, BrijRama Palace और Radisson जैसे होटल लग्जरी सेगमेंट में आते हैं। BrijRama Palace दशाश्वमेध घाट पर ही है जो एक हेरिटेज प्रॉपर्टी है। यहाँ ठहरना अपने आप में एक अनुभव है।
बुकिंग टिप यह है कि पीक सीजन यानी अक्टूबर से मार्च में एडवांस बुकिंग जरूर करें। देव दीपावली और महाशिवरात्रि के आसपास होटल बहुत जल्दी फुल हो जाते हैं। MakeMyTrip, Booking.com या OYO से ऑनलाइन बुकिंग करने पर अच्छे डिस्काउंट मिल सकते हैं।
One Day Trip Guide
अगर आपके पास सिर्फ एक दिन है तो यह प्लान फॉलो करें।
सुबह 5 बजे गंगा में नाव की सवारी
सुबह जल्दी उठकर गंगा में नाव की सवारी करें। सूर्योदय के समय घाटों का नजारा सबसे खूबसूरत होता है। नाव वाले 150 से 300 रुपये में एक घंटे की सवारी करा देते हैं। दशाश्वमेध घाट से नाव लें और हरिश्चंद्र घाट तक जाएँ। रास्ते में सभी प्रमुख घाट दिखेंगे।
सुबह 8 बजे सारनाथ जाएँ
नाव की सवारी के बाद नाश्ता करें और सारनाथ निकलें। ऑटो या ओला से 20 मिनट में पहुँच जाएँगे। किराया 150 से 200 रुपये लगेगा। सारनाथ में 2 से 3 घंटे बिताएँ।
दोपहर में काशी विश्वनाथ मंदिर
सारनाथ से वापस आकर काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करें। नया कॉरिडोर बनने के बाद यहाँ का अनुभव और बेहतर हो गया है। दोपहर में भीड़ कम होती है इसलिए दर्शन जल्दी हो जाते हैं। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान अंदर ले जाना मना है।
शाम को गंगा आरती
शाम 6 से 7 बजे दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती होती है जो मिस नहीं करनी चाहिए। यह आरती दुनियाभर में मशहूर है। अच्छी जगह पाने के लिए 5 बजे तक पहुँच जाएँ। आरती के बाद गलियों में घूमें और बनारसी पान का मजा लें।
वाराणसी कैसे पहुँचें
ट्रेन से
वाराणसी जंक्शन और मुगलसराय जंक्शन दोनों से देश के सभी बड़े शहरों के लिए ट्रेनें मिलती हैं। दिल्ली से काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस और मुंबई से महानगरी एक्सप्रेस पॉपुलर ट्रेनें हैं।
फ्लाइट से
लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट शहर से 25 KM दूर है। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और कोलकाता से डायरेक्ट फ्लाइट्स मिलती हैं। एयरपोर्ट से शहर तक ओला या उबर से 300 से 400 रुपये में पहुँच सकते हैं।
सड़क से
लखनऊ से वाराणसी करीब 300 KM है और बस या कार से 5 से 6 घंटे लगते हैं। प्रयागराज से करीब 120 KM है। UP रोडवेज और प्राइवेट बसें रेगुलर चलती हैं।
खाने में क्या ट्राई करें
वाराणसी का खाना अपने आप में एक अनुभव है। कचौड़ी गली की सुबह की कचौड़ी जलेबी जरूर खाएँ। लस्सी ब्लू लस्सी शॉप की मशहूर है जो कई दशकों से चल रही है। बनारसी पान यहाँ का सिग्नेचर है। चाट और तमाम स्ट्रीट फूड गोदौलिया चौक के पास मिलते हैं। बनारसी थाली भी ट्राई करें जिसमें दाल, चावल, सब्जी और मिठाई सब मिलता है।
Pros और Cons
Pros
- आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दोनों अनुभव एक साथ मिलता है
- 50 KM में कई Hidden Tourist Places हैं
- हर बजट के होटल उपलब्ध हैं
- ट्रेन, फ्लाइट और सड़क तीनों से आसानी से पहुँच सकते हैं
- गंगा आरती और नाव की सवारी यादगार अनुभव है
- खाने के लिए बनारसी स्ट्रीट फूड मशहूर है
- एंट्री फीस कहीं नहीं या बहुत कम है
- विदेशी टूरिस्ट्स के लिए भी सेफ और फ्रेंडली है
Cons
- गर्मियों में बहुत तेज गर्मी पड़ती है
- पीक सीजन में भीड़ बहुत ज्यादा होती है
- घाटों के पास गलियाँ बहुत तंग हैं
- ऑटो वाले कई बार ज्यादा किराया माँगते हैं
- श्मशान घाट पर फोटोग्राफी करने पर विवाद हो सकता है
- बारिश के मौसम में गंगा का पानी बढ़ने से कुछ घाट डूब जाते हैं
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
हरिश्चंद्र घाट पर जाते समय सादे कपड़े पहनें। यह श्मशान भूमि है इसलिए चटख रंग के कपड़ों से बचें। श्मशान एरिया में फोटो न लें। वहाँ काम करने वाले डोम से बिना इजाजत बात न करें। गंगा में नहाने से पहले सामान सुरक्षित जगह रखें। नाव की सवारी के लिए पहले से रेट तय कर लें। ऑटो या रिक्शा लेते समय मोलभाव जरूर करें।
फाइनल वर्डिक्ट
Harishchandra Ghat वाराणसी की उन जगहों में से है जो आपको अंदर से बदल देती है। यह कोई मामूली टूरिस्ट स्पॉट नहीं है। यहाँ आकर जिंदगी की असलियत समझ आती है। और इसके आसपास 50 KM में जो Hidden Tourist Places हैं वो आपकी ट्रिप को कम्प्लीट बनाते हैं। चाहे एक दिन की ट्रिप हो या तीन दिन की, वाराणसी हर बार कुछ नया सिखाती है। बस प्लानिंग सही करें, होटल पहले से बुक करें और खुले दिल से इस शहर को महसूस करें।






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